Tuesday, October 9, 2012

सुना है वो जब मायूस होतें हैं तो हमें बहुत याद करतें हैं                          तुम ही बताओ उनकी खुशियों की दुआ माँगू या  मायूसी की 


कब माँगा के वो ज़िंदगी मेरे नाम कर दें 
मुझे देख लें बस इतना काम करदे 
रोज़ बस एक बार याद कर लें मुझको 
हम इसी में ज़िंदगी तमाम करदें 


अगर तुम हमसे दूर रह कर खुश हो तो सदा खुश रहना 
खुदा गवाह है हमने सदा तेरी खुशियों की दुआ मांगी है 


सिर्फ अहसास बदल देता है दुनिया में शक्लें यारो 
वर्ना मुहब्बत और नफरत एक ही दिल से की जाती है 


कितना अज़ीब है मेरे यार का अंदाज़-ऐ-मुहब्बत 
एक ज़ख्म देता है रोज़ और कहता है अपना ख्याल रखना 

मानता हूँ मै,  कि  मेरे कातिल वही थे 
सारे शहर में तारीफ़ के काबिल भी वही थे 
कहते थे हम तेरे हैं और तेरे रहेंगे 
जब लगी महफ़िल दुश्मनों की 
सबसे आगे वही थे वही थे 

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